सलाखों के पीछे रहेगा गुरमीत राम रहीम, खारिज हो सकती है पैरोल की अर्जी


डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बड़ा झटका लग सकता है. पत्रकार हत्या और साध्वियों के साथ रेप के दोषी राम रहीम की पैरोल की अर्जी खारिज हो सकती है.


 



डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बड़ा झटका लग सकता है. पत्रकार हत्या और साध्वियों के साथ रेप के दोषी राम रहीम की पैरोल की अर्जी खारिज हो सकती है. दरअसल, राम रहीम ने खेतीबाड़ी के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन उसके पास कोई कृषि भूमि ही नहीं है. सारी भूमि डेरा सच्चा सौदा ट्रस्ट के नाम है.


 


रोहतक की सुनारिया जेल में बंद गुरमीत राम रहीम ने खेती-बाड़ी को आधार बनाकर पैरोल मांगी है, लेकिन सिरसा जिला प्रशासन को जो रिपोर्ट हरियाणा सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने भेजी है, उसके मुताबिक राम रहीम के नाम पर सिरसा में कोई भी कृषि भूमि नहीं है.


बतौर किसान नहीं रजिस्टर्ड है राम रहीम


 


रेवेन्यू डिपार्टमेंट के तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि डेरे के पास कुल 250 एकड़ भूमि है, लेकिन इस जमीन के रिकॉर्ड पर कहीं भी राम रहीम मालिक या बतौर किसान रजिस्टर्ड नहीं है. माना जा रहा है कि सिरसा के रेवेन्यू डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के आधार पर राम रहीम की पैरोल की याचिका खारिज की जा सकती है.


 


पैरोल के पक्ष में नहीं है हरियाणा पुलिस


इसके अलावा हरियाणा पुलिस की खुफिया रिपोर्ट भी राम रहीम को पैरोल देने के हक में नहीं हैं. पुलिस का मानना है कि ऐसा करने पर सिरसा में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और पंचकूला जैसे हालात बन सकते हैं.


42 दिनों के पैरोल की अर्जी


दो-दो साध्वियों से रेप और पत्रकार की हत्या मामले में सजा काट रहा है गुरमीत राम रहीम के जेल से बाहर आने पर सस्पेंस गहरा गया है. राम रहीम ने 42 दिनों के पैरोल की अर्जी दी है. जेल प्रशासन ने अच्छे व्यवहार के सर्टिफिकेट के साथ हरी झंडी भी दे दी. अब जिला प्रशासन को राम रहीम के जेल से बाहर आने को लेकर फैसला लेना है, लेकिन रेवेन्यू डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के बाद अब उसकी पैरोल की अर्जी खारिज हो सकती है.


पैरोल के समर्थन में हरियाणा सरकार


हरियाणा में चुनाव से पहले राम रहीम को लेकर सियासत गर्म हो गई है. राम रहीम की करतूत से हैरान-परेशान रही हरियाणा की खट्टर सरकार पैरोल को लेकर काफी उदार दिख रही है. जेल मंत्री कृष्णलाल पंवार, राम रहीम के अधिकार और कानूनी हक की वकालत कर रहे हैं तो बड़बोले मंत्री अनिल विज खुलकर समर्थन में उतर आए हैं.



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