बोले डॉ उदित राज – हम प्रशांत भूषण के साथ , ख़त्म हो अवमानना कानून {contempt of court}

 

डॉ उदित राज, परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज वकील प्रशांत भूषण  के निवास स्थान पर मिलकर सहानुभूति व्यक्त कि . उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण जी को इमानदारी और आम जनता कि समस्या को उठाने कि सजा मिल रही है. कोविद के समय सुप्रीम कोर्ट को जब उनके राहत के लिए स्वयम संज्ञान लेना चाहिए था . लेकिन ऐसा नहीं हुआ . प्रशांत भूषण कि ऐसे मानवतावादी वकील हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि वो हस्तक्षेप करे और सरकार कि जिम्मेदारी तय की जायेगी , मजदूरों को घर तक पहुचाने और रहने खाने कि व्यावस्था हो. सुप्रीम कोर्ट के पास इस बड़े कार्य के लिए समय नहीं था लेकिन एक पत्रकार अर्नब गोस्वामी के लिए तत्काल सुनवाई की गयी . सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायलय में एक आम आदमी अपने लिए न्याय प्राप्त ही नहीं कर सकता है , चूंकि न्याय बहुत महगा है. 

डॉ उदित राज ने आगे कहा कि जज भगवान् हो गए हैं. वो कोई गलती कर नहीं सकते अवमानना का उपयोग नहीं बल्कि इसके माध्याम से लोगों को डराया जा रहा है . अवमानना जैसी बात अमेरिका एवं अन्य देशों में ख़तम हो चुका है तो भारत मे भी ख़तम होना चाहिए. डॉ उदित राज ने कहा कि जज क्या भगवन हो गए हैं, जो गलती नहीं कर सकते. गलत को गलत कहना अवमानना कैसे हो सकती है. गत दो –तीन दशक से उच्च न्यायपालिका गरीब- दलित-पिछड़ा- आदिवासी आरक्षण विरोधी हो गयी है . डॉ उदित राज ने समाज और सरकार से अपील किया कि हर तरफ से आवाज़ उठे और अवमानना का जो मुकदमा किया गया है, उसको बर्खाश्त किया जाय.