स्वतंत्रता की लड़ाई में भी शायरों की अहम भूमिका रही : ज़ाकिर खान


नई दिल्ली ! सोफ़िया एजुकेशनल एवं वेलफ़ेयर सोसाइटी द्वारा एक मुशायरे का आयोजन उत्तर पूर्वी दिल्ली स्थित मुस्तफाबाद इलाक़े में किया गया ! डी डी उर्दू के प्रोडूसर ख़ालिद आज़मी के सम्मान में आयोजित इस मुशायरे में मुमताज़ सादिक़ की पुस्तक ‘अंतर्मन से’ का विमोचन भी किया गया ! इस मौक़े दिल्ली प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमेन ज़ाकिर खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और अध्यक्षता मशहूर शायर अरशद नदीम द्वारा की गई इसके अलावा प्रमुख समाजसेवी व पूर्व पार्षद  मास्टर शेर मोहम्मद, फ़ेस ग्रुप के चेयरमेन डॉक्टर मुश्ताक़ अंसारी, समाज सेवी हाजी सलीम शाहिद और शायर क़मर अंजुम आदि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ! मंच का संचालन दानिश अय्यूबी द्वारा किया गया
इस मोके पर  मुमताज़ सादिक लेखक (अंतर्मन से) ने कहा कि इस किताब मे ऐसी कविताये है जिनको पांच खंडो मे बांटा गया है,पहला दर्शन, दूसरा सामाजिक विषयों पर, तीसरा नारी मन की संवेदनाये, चौथा व्यंग और पांचवा विविध, जो सभी कवितायें हमारी रूह  से जुडी हुई है और ये हमारी रूहानियत का अहसास कराती हैं !
आयोग के अध्यक्ष ज़ाकिर खान ने कहा कि मुशायरे सामाजिक मुद्दों को अपने अंदाज मे कहने का हुनर रखते हैं और समाज को जगाने के साथ साथ प्रेरित भी कहते हैं ! स्वतंत्रता की लड़ाई में भी शायरों की अहम भूमिका रही ! उन्होंने यह भी कहा कि सौफिया संस्था अलग अलग पहलुओं पर काम कर रही है जिसमे महिलाओं के हक़ के लिए काम करना , ट्रेनिंग देकर उनको काम करने के लिए तैयार करना अब तक हजारों महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार दिला चुके है !
खालिद आज़मी (डी  डी  उर्दू  प्रोड्यूसर) ने कहा कि आज के मुशायरे मे बहुत ही बेहतरीन शायरी अलग अलग मुद्दों पर सुनने को मिली जिससे लोगों मे समाज के प्रति काम करने का जज्बा पैदा होगा और इस तरह के मुशायरा होते रहे चाहिए और सौफिया जैसे संस्था अपना काम बहुत ही ईमानदारी से कर रही है और समाज को प्रेरित करने का काम कर रही है !
संस्था के अध्यक्ष सुहैल सैफी ने कहा कि संस्थाएं समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं और सौफिया दिल्ली जैसे शहर मे अलग अलग इलाकों मे अलग अलग मुद्दों पर समाज को जगाने का काम पिछले 16 सालों से काम कर रही है और दिल्ली के अलग अलग विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है ! इस प्रोग्राम मे खालिद आज़मी, अरशद नदीम, मुमताज़ सादिक, कमर अंजुम, आसिफ नज़र, क़ासिम समशी, आमिर सलीम, अमीर अमरोहवी, जिगर नोगांनवी, शकील बरेलवी, उफ़ुक़ फरीदी, इक़बाल मसूदी हुनर, शाकिर देल्हवी, फरात उल्लाह फतह, सदफ बरनी, सरताज अमरोहवी, फरीद असहास, के. शंकर सौम्य शायरों ने अपने अपने कलाम पेश किए !
इस मोके पर अहमद नदीम, कादिर, सर्वेश पांडेय, समरीन, हाजी नईम, एहतशाम, इसरार अहमद मुन्ना, मोहसिन, ऐजाज़ सादिक, मकसूद अहमद, मोहम्मद ज़ुबैर आदि भी शामिल रहे !