किसानों का समर्थन कर रहे अखिलेश यादव को पुलिस ने किया गिरफ़्तार


उत्तर प्रदेश 7 दिसम्बर ! समाजवादी पार्टी मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चोधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान यात्रा में शामिल होने जा रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और अन्य विधायकों एवं नेताओं की गिरफ्तारी कर भाजपा सरकार ने लोकतंत्र में उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है। यह दम्भी सरकार है जिसे जनता के अधिकारों को कुचलने में जरा भी लोकलाज नहीं है। घमण्ड में चूर भाजपा सरकार सत्ता के दुरूपयोग की आदी हो रही है।

     भाजपा सरकार चाहती है किसानों को राहत और सुविधा से जीने का अवसर न मिले। उसने तीन कृषि अधिनियमों के माध्यम से किसानों के हितों पर आघात किया है।अखिलेश यादव ने किसानों के 8 दिसम्बर के भारत बंद को पूर्ण समर्थन का निर्देश दिया और पूरे प्रदेश के सभी जनपदों में किसान यात्राओं का आयोजन किया।

     लेकिन भाजपा सरकार ने अपनी हठधर्मी दिखाते हुए पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार कन्नौज जा रहे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को वहां जाने से रोकने के लिए घटिया मानसिकता प्रदर्शित कर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाते हुए उन्हें पहले तो घर में ही नज़र बंद करने की कोशिश की गई और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर एक सांसद के रूप में उनके विशेषाधिकार की भी अवमानना की गई।

     कैसी विडम्बना है कि अखिलेश यादव के आवास पर देर रात्रि से ही बैरिकेडिंग कर दी गई थी। उनकी सुरक्षा फ्लीट में लगे वाहन भी जब्त कर लिए गए। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अतिरिक्त प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं। उनके साथ पुलिस का धक्का मुक्की करना, अभद्र व्यवहार जनता देख रही है। वह उसे बर्दाश्त नहीं करेगी।

     श्री चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव के लोकप्रिय व्यक्तित्व से सत्तादल घबराया हुआ है। उनके साथ अलोकतांत्रिक व्यवहार और उनकी राजनीतिक गतिविधियों को रोकने की कुचेष्टा संविधान विरोधी कृत्य है। इसकी जनता में व्यापक प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। किसानों, नौजवानों की आवाज को कुचलने का भाजपा का प्रयास उनको ही भारी पड़ेगा। इसका खामियाजा भी भाजपा उठाएगी।

     समाजवादी पार्टी आंदोलनकारी किसानों के साथ खड़ी है। समाजवादी पार्टी किसानों की पार्टी है। समाजवादी पार्टी की नीतियां हमेशा किसानों के पक्ष में रही है। वह आज भी किसानों के साथ है। किसान कड़ाके की ठण्ड में अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। उनमें कईयों की मौत हो चुकी है। किसान आत्महत्या भी कर रहे है। उनके समर्थन में समाजवादी पार्टी का आवाज उठाना कहां से अनुचित है। समाजवादी पार्टी की आर्थिक नीतियां शुरू से ही खेती-किसानी पर आधारित रही है।

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