पेडियाट्रिक एवं प्रीवेंटिव डेन्टिस्ट्री विभाग का 53 वा स्थापना दिवस

लखनऊ 29 दिसम्बर। पेडियाट्रिक एवं प्रीवेंटिव डेन्टिस्ट्री विभाग का 53 वा स्थापना मनाया गया एवं उसी दिवस को विभागीय वेबसाइट का माननीय राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार संदीप सिंह वित्त,प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कर कमलों द्वारा उद्घाटन किया गया ! डॉ0अनिल चंद्रा अधिष्ठाता दन्त विज्ञान संकाय ने अपने उद्बोधन में बताया कि स्नातक (बी॰डी॰एस॰) स्तर पर सबसे पहले विभाग ऑर्थोडॉन्टिक्स विभाग के साथ जुड़ा हुआ था जिसके प्रोफेसर आर॰के॰राय विभागाध्यक्ष थे। उसके बाद पीडियाट्रिक एवं प्रीवेंटिव डेन्टिस्ट्री विभाग में (एम॰डी॰एस॰) पाठ्यक्रम की 4 छात्राओं के साथ 1967 में शुरुआत हुई थी सर्वप्रथम प्रोफेसर सतीश चंद्रा,जिन्होंने 38 पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित की हैं विभागाध्यक्ष के रूप में 16 वर्षों तक कार्य किया। उसके बाद प्रोफेसर जे॰एन॰ जैसवाल ने विभागाध्यक्ष के रूप में 01 नवंबर 1999 से सितंबर 2002 तक‌ विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया उसके बाद प्रोफेसर आर॰के॰पाडेण्य ने अक्टूबर 2002 से 16 जनवरी 2018 तक विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया तथा उसके बाद प्रोफेसर राकेश कुमार चक्र 17 जनवरी 2018 से अब तक विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहें है। प्रोफ़ेसर राकेश कुमार चक्र,विभागाध्यक्ष ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया तथा माननीय मंत्री ने अपने व्याख्यान में विभाग के कार्यों को सराहा एवं उच्च गुणवत्ता के बच्चों के इलाज के लिए प्रशंसा की एवं विभागाध्यक्ष ने बताया कि विभाग में 0 से 15 वर्ष तक के बच्चों के मुख से संबंधित सभी बीमारियों का उच्च गुणवत्ता के साथ इलाज किया जाता है जैसे कि दूध एवं परमानेंट दांतों की सुंदरता एवं उनके कार्यों को बनाए रखना तथा टेढ़े-मेड़े दुर्घटनाग्रस्त दांतों का इलाज करना तथा दूध एवं परमानेंट दांतों को सड़ने से बचाना,मुख के बुरी आदतों का इलाज करना ! विभाग हर महीने बाल्य दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन करता है जिसमें लगभग 4000 प्रतिवर्ष मरीज देखे जाते हैं तथा बच्चों व उनके अभिभावक एवं शिक्षकों की काउंसिलिंग की जाती है ! विभाग में लेजर मशीन के द्वारा नवीन तकनीक से इलाज किया जाता है एवं कॉन्शियस सिडेशन यूनिट से जो बच्चे इलाज कराने में परेशानी महसूस करते हैं या सहयोग नहीं कर पाते हैं उनका इस मशीन के द्वारा एनेस्थीसिया देकर इलाज किया जाता है जिससे उन बच्चों को कोई तकलीफ नहीं होती है।

सईद सिद्दीकी 
वरिष्ठ संवाददाता