शिक्षा व संस्कार की कमी के कारण बढ़ रहे हैं तलाक़ के मामले : डॉ० एस फ़ारूक़



 दहेज माँगना इस्लाम मज़हब में है हराम

नई दिल्ली । सीरत - ए - नबी कमेटी द्वारा ‘दहेज समाज के लिए अभिशाप’ विषय पर एक  सैमीनार का आयोजन ओखला क्षेत्र में किया गया । जिसकी अध्यक्षता अब्दुल रशीद अंसारी द्वारा की गई। सेमिनार की शुरुआत कारी मोहम्मद एहसान ने तिलावत - ए - क़ुरान और मौलाना जैनुल आबेदीन हाशमी की नात से हुई।मंच का संचालन कौसर अली द्वारा किया गया।
इस मौक़े पर डॉक्टर एस. फ़ारूक़ ने आयशॉ की खुदकशी पर एक शेयर के साथ चर्चा करते हुए कहा कि 
दिखाई दे न दे मगर शामिल ज़रूर होता है । 
खुदकशी करने वाले का क़ातिल ज़रूर होता है।।
उन्होंने कहा शिक्षा व संस्कारों की कमी के कारण बहुत सी लड़कियाँ ग़ैर मज़हब के लड़कों से शादी कर लेती हैं और फिर जल्द ही तलाक़ भी हो जाती है।इसलिए निकाह के क़ाज़ी व मौलवियों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह पति,पत्नी के कर्तव्य व अधिकारों के प्रति जन मानस को जागरूक करें। इस सिलसिले में हमारे नबी की ज़िंदगी एक नमूना है। मुफ़्ती आदिल जमाल नदवी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ग़ैर मुस्लिमों की तरह अब मुस्लिम समाज में भी दहेज की माँग व नुमाईश आम बात हो गई है । जिसका ग़रीब आदमी की ज़िंदगी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।उन्होंने कहा हमारे नबी ने जो हज़रत फ़ातिमा को दहेज दिया उसकी वजह यह थी कि नबी करीम हज़रत फ़ातिमा के पिता के साथ साथ हज़रत अली के सरपरस्थ भी थे।उन्होंने कहा दहेज माँगना और दहेज के लिए ज़बरदस्ती करना इस्लाम मज़हब में हराम है । मौलाना वली उल्लाह सईदी (सचिव, जमातें इस्लामी) ने कहा कि दहेज की रोकथाम के लिए हमें अपने लड़कों की शादी के वक़्त दहेज लेने से इंकार करके ख़ुद मिसाल पेश करनी चाहिए, सिर्फ़ जलसों में चर्चा करने से काम नहीं चलेगा । उन्होंने कहा हमारे नबी ने औरत को समाज में इज़्ज़त और सम्मान देने का हुक्म दिया है , इसलिए हमें अपनी लड़कियों की तालीम और तरबियत पर विशेष बल देना चाहिए और निकाह दीनदार लड़कों से करना चाहिए, जिनका ईमान और अख़लाक़ दुरुस्त हो, निकाह मस्जिद में किए जाने का चलन भी बढ़ना चाहिए तथा विरासत में बहन बेटियों को हिस्सा देना चाहिए तभी दहेज की लानत ख़त्म हो सकती है। सेमिनार में मुफ़्ती अफ़रोज़ क़ासिम , असलम एडवोकेट , मोहम्मद इलयास सैफी व मुज़फ़्फ़र अली आदि समाज के ज़िम्मेदार व्यक्तियों ने भी शिरकत की तथा मौलाना मुहिबुल्लाह नदवी की दुआ के साथ सेमिनार सम्पन्न हुआ।