संसद में फ़ोन टेंपिंग पर चर्चा, जनता के धन का दुरुपयोग

 


दोस्तों आज हमारे देश की सर्वोच्च संसद का मानसून सत्र था।     

 संसद चलाने में करोड़ों रुपए का खर्चा प्रति दिन होता है लेकिन हमारे संसद में क्या होता है, देश भली भाँति जानता है। कोई भी पार्टी मूल मुद्दों को गम्भीरता से नही लेती। आम जनता डीजल,पेट्रोल और रसोई गैस की क़ीमतों को लेकर परेशान है लेकिन किसी भी पार्टी ने संसद में चर्चा नहीं की,ना कोई मुद्दा उठाया। चर्चा हुई तो फोन टैपिंग का राजनेताओं ने ऐसा मुद्दा उठा दिया कि मूल मुद्दे पिछड़ गए । अगर सरकार ने फोन टेप कर भी लिए तो क्या दिक्कत है,कौन सा आप लोग देश विरोधी काम कर रहे थे,या कोई चोरी की बातें कर रहे थे जो सरकार ने सुन ली।नेताओं को संसद में मूल मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए यह संसद अपने पर्सनल मैटर उठाने के लिए नहीं है और अगर फोन टेप हो रहे थे तो आप लोगों को पता चल गया था तो आप कहां सो रहे थे, हमारे देश का चौथा स्तंभ मीडिया है, आप लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहते हैं इस बात की भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देते,क्यों छुपा कर बैठे रहे ? कि मानसून सत्र में संसद चलेगी तब यह मैटर संसद में उठाएंगे । संसद में ना कोविड-19 बीमारी पर कोई चर्चा हुई और ना डीजल पेट्रोल पर चर्चा हुई ना महंगाई पर चर्चा हुई जनता को ऐसे राजनेताओं का बहिष्कार कर देना चाहिए, जो संसद में जाकर अपने पर्सनल मैटर को उठाते हैं और जनता द्वारा चुने गए जनता के मैटर संसद में नहीं उठाते।संसद में उन्हीं मैटर पर चर्चा होनी चाहिए जो मूल मुद्दे हैं । इस पर सरकार को कानून बनाना चाहिए,सरकार हजारों कानून बनाती है। संसद में मूल मुद्दों पर ही चर्चा हो ऐसा कानून सरकार को बनाना चाहिए। संसद में जो आज की चर्चा देखी उससे ऐसा लगता है कि सभी मिले हुए हैं क्योंकि डीजल,पेट्रोल रसोई गैस यह नेता अपनी जेब के पैसे से नहीं खरीदते। जनता के पैसे से डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस इनको मिलती है इसलिए इनको रेट नहीं मालूम,किसान की हालत क्या हुई यह भी इनको नहीं पता क्योंकि गमलों में करोड़ों रुपए की गोभी पैदा हो जाती है, किसान 1 एकड़ में लाख रुपए की गोभी पैदा नहीं कर पाता है। सभी राजनेताओं से अपील है कि संसद में बैठकर ऐसा कोई उपाय निकालें जिससे आम आदमी को डीजल पेट्रोल रसोई गैस महंगाई से राहत मिले ।


लेखक :- अमरकेश सिंह

कायमगंज जिला फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश

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